
जीवन में कितना कुछ मिला हुआ है, अक़्सर हमारा ध्यान उन चीज़ों पर नहीं टिकता। जो भी हमारे पास है उसे हम अपना अधिकार समझ लेते हैं, न तो हम उसके लिए कृतज्ञ होते और ना ही उसका आनन्द ले पाते। लेकिन हमारे जीवन में यदि कोई कमी है या कुछ नुक़सान हो गया तो उसकी शिकायत करते रहते हैं और अपना सारा ध्यान उसका अफ़सोस मनाने में लगा देते हैं, जबकि ख़ुश होने की ज़्यादा वज़हें मौज़ूद होती हैं।
जीवन का दूसरा नाम ही आनंद है, जो भी मिला है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखें, उसके साथ ख़ुश रहें। जो चला गया उसका अफ़सोस करने की बज़ाय यह सोचें कि वह आपका था ही नहीं। फिर देखिए पूरा जीवन ही उत्सव बन जाएगा।