
How and from which community did the worship of God in the form of animals begin?रोमियों 1: 21 इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहाँ तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया। 22वे अपने आप को बुद्धिमान जताकर मूर्ख बन गए, 23और अविनाशी परमेश्वर की महिमा को नाशवान् मनुष्य, और पक्षियों, और चौपायों, और रेंगनेवाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला।Romans 1: 21 because, although they knew God, they did not glorify Him as God, nor were thankful, but became futile in their thoughts, and their foolish hearts were darkened.22 Professing to be wise, they became fools,23 and changed the glory of the incorruptible God into an image made like corruptible man--and birds and four-footed animals and creeping things.