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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा वर्ष 2025 के ‘Champions of the Earth’ पुरस्कार के लिए दुनिया भर से चुने गए पाँच लोगों में भारत की सुप्रिया साहू भी शामिल हैं. तमिलनाडु सरकार में सहायक मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत सुप्रिया साहू को, हाल ही में यूनेप ने, ‘प्रेरणा और कार्रवाई’ की श्रेणी में सम्मानित किया है. सुप्रिया अत्यधिक गर्मी से निपटने के लिए व्यावहारिक उपायों पर काम कर रही हैं. इनमें स्कूलों में ‘ठंडी छत’ पहल, प्रकृति की बहाली, और जलवायु जोखिमों को ध्यान में रखकर, ढाँचा विकास को आगे बढ़ाना शामिल है. यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि तमिलनाडु जैसे प्रदेश के लिए जलवायु परिवर्तन के असर कम करने और अनुकूलन के लिए अभी से तैयार होना क्यों अहम है...
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पारम्परिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का दूसरा वैश्विक शिखर सम्मेलन, नई दिल्ली में 17 से 19 दिसम्बर 2025 तक आयोजित किया गया. WHO और भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की साझेदारी में हुए इस सम्मेलन में दुनिया भर से नीति - निर्माता, वैज्ञानिक, चिकित्सक और आदिवासी ज्ञान-धारक शामिल हुए. चर्चा का केन्द्र, पारम्परिक चिकित्सा को विज्ञान, साक्ष्य और ज़िम्मेदार व्यवहार के आधार पर स्वास्थ्य प्रणालियों में सुरक्षित और नैतिक तरीक़े से जोड़ने पर रहा.
यूएन न्यूज़ की अंशु शर्मा ने, शिखर सम्मेलन के दौरान, आयुष मंत्रालय के जामनगर स्थित आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसन्धान संस्थान की निदेशक डॉक्टर तनुजा मनोज नेसारी के साथ ख़ास बातचीत की, जिसमें उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं, उभरते साक्ष्यों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचारों व आगे की दिशा पर विस्तृत जानकारी दी.
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दिल्ली से सटे नोएडा के 17 वर्षीय देव करन ने ग्रामीण इलाक़ों में तालाबों की अनदेखी को नज़रअन्दाज़ करने के बजाय, कुछ ऐसा करने का बीड़ा उठाया, जिसने अनेक तालाबों की सफ़ाई के लिए, लोगों नई ऊर्जा भर दी है.
देव करन ने इस काम के लिए वर्ष, 2024 में Pondora नामक संस्था शुरू की - एक ऐसी पहल जो सामुदायिक भागेदारी और किफ़ायती तकनीक की मदद से भारत के तालाबों का मानचित्रण, पुनर्स्थापन और संरक्षण करती है.
उनकी परियोजना, अहम जल-स्रोतों को बचाने व टिकाऊ जल प्रबन्धन के बारे में युवजन व समुदायों को जागरूक एवं सक्रिय बनाती है.
देव करन को, जिनीवा स्थित यूएन मुख्यालय में आयोजित युवा कार्यकर्ता सम्मेलन (YAS25) में सम्मानित दुनिया के पाँच चुनिन्दा युवा परिवर्तनकारियों में स्थान मिला है. यह सम्मेलन तकनीक के ज़रिए सामाजिक एवं पर्यावरणीय बदलाव ला रहे युवाओं को पहचान देता है.
इस वर्ष सम्मेलन का विषय था “From Hashtag to Action”, यानि ऑनलाइन आवाज़ों को वास्तविक ज़मीनी बदलाव में बदलना.
यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने, जिनीवा से हाल ही में भारत वापिस लौटे देव करन के साथ, नई दिल्ली स्थित यूएन कार्यलय में ख़ास बातचीत की और उनकी परियोजना के बारे में जानकारी हासिल की.
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पटना की पूजा मिश्रा का विवाह, 15 वर्ष की आयु में करा दिया गया था और 17 साल की छोटी सी उम्र में उन्हें मालूम हुआ कि वो एचआईवी से संक्रमित हो गई थीं. तब से अब तक अनगिनत चुनौतियों का सामना करते हुए, आज पूजा का संक्रमण पूरी तरह दबा हुआ है, और वो देशभर के युवाओं की मज़बूत आवाज़ बन चुकी हैं.
पूजा अब, भारत में एचआईवी के साथ जी रहे लोगों का राष्ट्रीय गठबन्धन (NCPI+) की राष्ट्रीय युवा समन्वयक के रूप में, युवाओं के अधिकार, मानसिक स्वास्थ्य और इलाज जारी रखने की अहमियत पर काम करती हैं और अपने यूट्यूब चैनल “Youth Speak Now” से हज़ारों युवाओं तक भरोसेमन्द जानकारी पहुँचाती हैं.
पूजा मिश्रा ने, विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) के अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की सहयोगी अंशु शर्मा के साथ एक ख़ास बातचीत में बताया कि किस तरह वह डर और कलंक से निकलकर, नेतृत्व करने और युवाओं को प्रोत्साहित करने के मुक़ाम तक पहुँचीं; और क्यों वह चाहती हैं कि सभी युवा अपनी दवा, अपने हक़ और अपनी आवाज़ के साथ मज़बूती से खड़े हों.
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हिंसक संघर्ष से गुज़र रहे या फिर शान्ति समझौते के बाद लोकतंत्र की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इच्छुक देशों में कोर्ट-कचहरी, जेल, क़ानून व्यवस्था अक्सर ध्वस्त हो चुकी होती है, और इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि वहाँ क़ानून के शासन को फिर से बहाल किया जाए.
दक्षिण सूडान में यूएन शान्तिरक्षा मिशन (UNMISS) में ‘क़ानून का शासन व सुरक्षा क्षेत्र में सुधार’ विभाग के निदेशक अनीस अहमद ने यूएन न्यूज़ हिन्दी के सचिन गौड़ के साथ बातचीत में बताया कि ढह चुकी क़ानून व न्यायिक व्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए मोबाइल कोर्ट समेत अन्य दीर्घकालिक उपायों का सहारा लिया जाता है ताकि आमजन की समस्याओं का निपटारा हो और संस्थाओं में लोगों का भरोसा फिर से जग सके.
कृत्रिम बुद्धिमता (एआई), टैक्नॉलॉजी, भ्रामक, जानबूझकर फैलाई जाने वाली ग़लत जानकारी जैसी समस्याओं से न्यायिक व क़ानून व्यवस्था की पुनर्बहाली में चुनौतियाँ और गहरी हुई हैं. उन्होंने कहा कि हर देश, हर समाज की तस्वीर अलग होती हैं, और इसलिए वहाँ स्थानीय सन्दर्भ के अनुरूप ही समाधान विकसित किए जाते हैं.
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भारत के गोवा राज्य में आयोजित होने वाला 'पर्पल फ़ेस्ट' विकलांग व्यक्तियों के लिए समर्पित एक अनोखा उत्सव है, जो समावेशन, सुलभता और समान अवसरों की भावना को उजागर करता है.
इस वर्ष, इस महोत्सव में देश और दुनिया भर से लोग एकत्र हुए. सन्देश स्पष्ट था - सच्चा विकास तभी सम्भव है जब हर व्यक्ति की भागेदारी सुनिश्चित हो.
इस अवसर पर यूएन न्यूज़ हिन्दी की अंशु शर्मा ने गोवा के सामाजिक कल्याण मंत्री सुभाष फलदेसाई से बातचीत में यह समझने की कोशिश की कि इस पहल के पीछे राज्य सरकार की क्या सोच और दृष्टिकोण है.
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