June 20, 2024, 03:18PM
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किताबों की ज़मीन बहुत बड़ी है। इस ज़मीन पर इंसानी समझ, इतिहास, तकनीक, साहित्य, हर चीज़ की नींव टिकी है। जब तथ्यों के साथ छेड़छाड़ की जाती है तब पहला प्रहार हमारी-आपकी इसी साझी ज़मीन पर होता है। जब मैं लॉस ऐंजेलेस में था तब इतिहास के प्रोफ़ेसर विनय लाल की निजी लाइब्रेरी देखने का मौक़ा मिला। देखते ही लगा कि हमारे दर्शकों को भी ऐसा संग्रह को देखने का मौक़ा मिलना चाहिए। प्रोफ़ेसर लाल के पास हज़ारों किताबों का संग्रह है, कई हज़ारों किताबें उन्होंने ख़ुद पढ़ी हैं। फिर भी वे मानते हैं कि जितना वे पढ़ते जाते हैं उतना ही कम जानते हैं। ये विनम्रता किताबें ही ला सकती हैं। आप भी कोई किताब उठाकर पढ़ना शुरू करेंगे तो नई-नई ज़मीनों का दौरा करने लगेंगे। पढ़ा कीजिए।
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