What Is Adenomyosis? | एडिनोमायोसिस कैंसर है या नहीं? | गर्भाशय एडेनोमायोसिस के क्या लक्षण हैं?
एडिनोमायोसिस में, गर्भाशय (एंडोमेट्रियम) की परत में ग्रंथियों से ऊतक गर्भाशय की मांसपेशियों की दीवार में बढ़ता है। गर्भाशय बड़ा हो जाता है, कभी-कभी आकार में दोगुना या तिगुना हो जाता है। एडेनोमायोसिस भारी, दर्दनाक मासिक धर्म और पेल्विक दर्द का कारण बन सकता है।
गर्भाशय एडेनोमायोसिस के मुख्य लक्षणों में भारी और दर्दनाक मासिक धर्म (ऐंठन), पेट के निचले हिस्से में दर्द, और सेक्स के दौरान दर्द शामिल हैं; इससे गर्भाशय बड़ा हो सकता है, पेट में सूजन या दबाव महसूस हो सकता है, और लगातार खून की कमी से थकान और एनीमिया भी हो सकता है, हालांकि कुछ महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखते.
फैटी लिवर और नॉर्मल लिवर में क्या अंतर है|What is thedifference between fatty liver and normal liver
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call: 919429065457Website : https://www.brahmhomeo.com/whatsapp : https://wa.me/919429065457लिवर फाइब्रोसिस क्या है ? | Liver Fibrosis Causes, Symptoms | क्या लिवर फाइब्रोसिस का इलाज संभव है?Instagram : / brahmhomeo facebook : / brahmhomeo youtube : / @drpradeepkushwaha-brahmhom1380 twitter : / brahmhomeopathy Website : https://www.brahmhomeo.com/DR PRADEEP KUSHWAHA has received "THE BEST STUDENT OF CENTURY AWARD (1920 TO 2019) BY HOME MINISTER OF GUJARAT IN 2020 FOR HIS EXCELLENCE WORK IN MEDICAL FIELD. He is the youngest homeopath of India who has created such a big homeopathic infrastructure and high tech management system single handed. After completing bachelor in homeopathy, he has done M.D. in medicine then M.D. in alternative medicine and post graduation in homeopathy from LONDON. He has invented his own method of curing patients holistically, scientifically with easy approach where not only patient’s health get better but his life changes positively. He is doing research in many life threatening diseases like cancer, coma, organ failure cases and death bed cases. Thousands of patients across the world has been cured. He believes that if disease can take a shape and destroy human life then health can also take its own shape and construct human life and we are here to provide that constructive health in you through modern homeopathy.BRAHM HOMEOPATHIC HEALING AND RESEARCH CENTRE :Active since 2011, with all advance technology , management system and many research based ideas for curing all impossible cases. We have a world class Research Based Scientific Treatment Module with High Tech patient management system for each Incurable, Hopeless, Organ Failure & Death bed cases. It is the biggest Homeopathic Centre of Ahmedabad where we see highest number of patients of our city. This is the first digital medical centre of GUJARAT. To improve the quality of health and quality of life in every single person is the motto of this centre. Soon , we are going to connect with all most every country in the world along with qualitative team of homeopaths across the world so that it can be so easy to cure our patient from every corner of the world. It is not only a treatment centre but also a research centre where every day new medicines are being invented for varieties of incurable diseases and also for providing better quality of health. To improve the quality of health and quality of life in every single person is the motto of this centre and is also our soul responsibility. Patient's health is everything for us.credite for row video : pixabay.com vecteezy.com canvaFACILITY PROVIDED BY THIS CENTREMost medicines are from Helios homeopathic pharmacy –London. (High Quality Medicines)Time saving management system.Team of well qualified doctors to assist you 24 hours.
आपकी थकान की वजह नींद की कमी हो सकती है ? Healthy body का secret — quality sleep 7–8 घंटे की नींद |
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**गैस, एसिडिटी और अल्सर का इलाज
**परिचय**
आज के भागदौड़ ज़िंदगी, में गलत खानपान और तनाव ने पेट से जुड़ी बहुत सी बीमारियों को आम बना दिया है।
- इनमें से सबसे ज़्यादा पाई जाने वाली तीन समस्याएँ हैं — **गैस **, **एसिडिटी ** और **अल्सर**।
- ये ३ बीमारियाँ आपस में ही जुड़ी होती हैं। अगर समय पर सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं।
1. गैस क्या है?
पेट में गैस बनना यह पाचन तंत्र की प्रक्रिया है, पर जब यह ज़्यादा मात्रा में बनने लगे या बाहर नही निकल पाए, तो पेट में दर्द, और सूजन तथा असहजता महसूस होती है।
- यह समस्या तब बढ़ती है, जब हम भोजन को पूरी तरह से पचा नहीं पाते और आंतों में गैस जमा हो जाती है।
२) पेट में गैस बनने के क्या मुख्य कारण हो सकते है?
पेट में गैस बनने के मुख्य कारण निचे अनुसार है - * जल्दी-जल्दी खाना को खाते जाना। * बहुत ही तला-भुना या ज्यादा मसालेदार भोजन को खाना * ज्यादा चाय, और कॉफी का सेवन करना * तनाव और रात में सही से नींद नहीं आना * कब्ज
३) गैस होने के क्या लक्षण होते है?
* पेट में भारीपन जैसा लगना * खट्ठी डकार का आना या पेट में दर्द का होना। * भूख भी सही से नहीं लगना। * कभी-कभी सीने में जलन का होना४) एसिडिटी क्या है?
जब पेट में बनने वाला हाइड्रोक्लोरिक एसिड ज़रूरत से भी ज़्यादा बनने लग जाता है, तो, वो ऊपर आता है, उसे **एसिडिटी** कहते हैं। - यह समस्या *(GERD)* का भी रूप ले सकती है।
##एसिडिटी के क्या कारण है?
* ज्यादा मसालेदार और ज्यादा बाहर का भोजन करना। * भूखे पेट ज्यादा समय तक रह जाना * अत्यधिक चाय और कॉफी का सेवन करना * ज्यादा देर तक जागना या सही से नींद नहीं आना# एसिडिटी के क्या लक्षण होते है?
* सीने में बहुत ही जोर से जलन का होना * छाती में दर्द का होना * डकार या उल्टी का होना##जीवनशैली में बदलाव करने से परिवर्तन ##
* भोजन करने के तुरंत बाद में नही लेटें। * दिन में छोटे - छोटे अंतर में भोजन को लें।५) अल्सर क्या है?
अल्सर का मतलब है, की — पेट, और छोटी आंत में छाला बन जाना। - सबसे आम प्रकार है **पेप्टिक अल्सर**। जब पेट में बहुत ही ज्यादा एसिड बनता है तब यह स्थिति होती है।## अल्सर का मुख्य कारण क्या होता है ?
* ज्यादा लंबे समय से दर्द निवारक दवा का सेवन करना * ज्यादा शराब और धूम्रपान करना * लगातार एसिडिटी का होना * अनियमित खानपान होने से भी# अल्सर का मुख्य लक्षण क्या है?
* सीने में जलन का होना * उल्टी का होना * वजन का कम हो जाना * भूख में कमी होना या नहीं लगना * पेट में छाले का होना#अल्सर से बचाव के लिए क्या करे ?
1. नियमित अपने सही समय पर भोजन करना। 2. जंक फूड, और तली चीज़ें और कार्बोनेटेड ड्रिंक से दुरी बनाये रखना । 3. डेली 30 मिनट तक कसरत करना 4. धूम्रपान और शराब से दूरी रखें। 5. भोजन को चबाकर खाएँ। 6. तनाव को कम करें और ७-८ घंटे की नींद पूरी लें।
१) पैंक्रियाटाइटिस (Pancreatitis) का इलाज और पूरी जानकारी?
**परिचय:**
अग्नाशय हमारे शरीर के पाचन तंत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है, जो की ,पेट के पीछे स्थित होता है। और पाचन एंजाइम तथा इंसुलिन जैसे हार्मोन को बनाता है।
पैंक्रियाटाइटिस को अग्नाशय सूजन भी कहते हैं।
- जब भी किसी कारण से यह भाग में सूजन हो जाता है. या इसके कोशिका क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो यह खुद ही अपने एंजाइम से पचने लगता है। यही स्थिति *पैंक्रियाटाइटिस* कहलाती है।
- यह रोग तीव्र और दीर्घकालिक दोनों के रूप में हो सकता है।
२) पैंक्रियाटाइटिस के कितने प्रकार होते है?
पैंक्रियाटाइटिस के २ प्रकार होते है
- 1. एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस - यह अचानक से शुरू होने वाला रोग है, जो की, कुछ दिनों तक रहता है। अगर सही तरह से इलाज किया जाये तो ,यह सही हो सकता है.
- एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस के प्रमुख कारण :: – शराब का बहुत ही अधिक सेवन करना , पित्त की पथरी , वायरल संक्रमण या कुछ दवा का साइड इफेक्ट का होना ।
2. क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस - यह दीर्घकालिक समय तक चलने वाली स्थिति है, जिस में अग्नाशय धीरे-धीरे कार्य करने की क्षमता को खो देता है।
- इसका मुख्य कारण है ::- ज्यादा लंबे समय तक शराब को पीना, पारीवारिक कारक, या बार-बार एक्यूट पैंक्रियाटाइटिस का हो जाना ।
३) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के क्या लक्षण दिखाई देते है?
पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के लक्षण निचे अनुसार होते है. जैसे की,
- * ऊपरी पेट में तेज दर्द का होना। जो की, पीठ तक फैल सकता है.
* उल्टी और मिचली * पेट में सूजन का हो जाना
* भूख नहीं लगना या तो कम लगना
* वज़न का अचानक से घट जाना
* पीलिया
४) पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** क्या होते है?
पैंक्रियाटाइटिस बीमारी के **मुख्य कारण** निचे बताये अनुसार है,
* ज्यादा शराब का सेवन करना।
* पित्त की पथरी * खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाना
* धूम्रपान का सेवन
* कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव से भी
* हाई कैल्शियम का स्तर
##पैंक्रियाटाइटिस का इलाज##
- 1. **अस्पताल में शुरुआती इलाज
**भोजन से आराम**
कुछ समय के लिए मरीज को खाना नहीं दिया जाता है, ताकि अग्नाशय को आराम मिल सके.
**इंट्रावेनस फ्लूइड (IV Fluids)**
शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट कमी को पूरा करने के लिए ड्रिप लगाई जाती है।
**दर्द निवारक दवाएं**
पेट के दर्द को कण्ट्रोल करने के लिए दर्द को कम करने वाली दवा दी जाती हैं।
- 2. **मूल कारण का इलाज *
अगर **पित्त की पथरी** का कारण है, तो *गॉलब्लैडर सर्जरी * को किया जाता है.
*शराब से पूर्ण परहेज करना अनिवार्य है।
*ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा हो जाने पर दवा दी जाती हैं, ताकि स्तर को कण्ट्रोल में कर सके.
-3. **क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस का उपचार
*एंजाइम सप्लीमेंट्स
- जब अग्नाशय सही तरह से एंजाइम नहीं बना पाता है, तो डॉक्टर कैप्सूल के रूप में देते हैं। जिस से की , भोजन ठीक से पच सके।
*इंसुलिन थेरेपी
- अगर इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो गया है, तो मधुमेह की तरह इंसुलिन दिया जाता है।
*पोषण संबंधी सपोर्ट
- हाई-प्रोटीन, और लो-फैट डाइट को दिया जाता है। और कभी-कभी विटामिन A, D, E, K खुराक को भी देते है.
*सर्जरी
- यदि नलिका में रुकावट हो तो सर्जरी से ब्लॉकेज को हटाया जाता है।
##घरेलू और जीवनशैली के संबंधी उपाय**
** शराब और धूम्रपान को तो, पूरी तरह से छोड़ें।
** कम चर्बी वाला आहार को लें।
** छोटे अंतराल में और बार-बार भोजन को करें।
**सही मात्रा में पानी को पिएँ।
** ज्यादा मसालेदार, और तला-भुना तथा जंक फूड को नहीं खाएँ।
**डॉक्टर के द्वारा दी गई दवा को सही और नियमित रूप से लें।
**तनाव को कम करने के लिए कसरत करें।
५)इसके क्या जटिलताएँ होती है?
अगर सही समय पर और सही इलाज न किया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है:
*अग्नाशय में सिस्ट का होना
* संक्रमण हो जाना
* सांस लेने में भी बहुत ही कठिनाई का होना
* मधुमेह
* पोषणतत्व की कमी