“मिलावटी हंसिकाएँ” — एक ऐसी कथा जहां हंसिकाओं की ‘मिलावट’ सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि इंसानी स्वभाव की दिलचस्प परतें हैं। डॉ. सरोजिनी प्रीतम की सधी हुई आवाज़ में एक सोचने पर मजबूर करने वाली कहानी।
इस एपिसोड में सुनिए “ससुराल — हंसिका पुराण”, जहाँ डॉ. सरोजिनी प्रीतम हंसिका के ससुराल के अनुभवों को चुटीले व्यंग्य और मीठे हास्य में पिरोकर प्रस्तुत करती हैं। शादी के बाद की सच्चाइयाँ, एकदम अनोखे अंदाज़ में।
“अनोखीबाई” — डॉ. सरोजिनी प्रीतम लेकर आई हैं एक ऐसी कथा, जो नाम की तरह ही अनोखी है। अनोखीबाई का स्वभाव, उनकी आदतें और उनके रहस्य… सब कुछ आपको कहानी के अंत तक बाँधे रखेगा।
“सींग वाले लेखक” — डॉ. सरोजिनी प्रीतम की प्रस्तुत एक अनोखी कहानी। एक लेखक, जिसके विचारों से नहीं, बल्कि उसके सींगों से शुरू होता है रहस्य। क्या यह कल्पना है, व्यंग्य है, या किसी गहरी सच्चाई का प्रतीक?
“बांके लाल की कुर्सी” — डॉ. सरोजिनी प्रीतम लेकर आई हैं एक दिलचस्प किस्सा, जहाँ एक साधारण सी कुर्सी बांके लाल की ज़िंदगी में अनोखे मोड़ लाती है। कहानी में छिपा है हास्य, भावनाएँ और थोड़ी-सी सीख।
डॉ. सरोजिनी प्रीतम प्रस्तुत करती हैं — “धोखा खाने का मज़ा”, एक व्यंग्यात्मक कहानी जो दिखाती है कि कभी–कभी धोखा भी जीवन का सबसे मज़ेदार सबक बन जाता है।