ज्योतिष और कुंडली की दुनिया में आपका स्वागत है! इस एपिसोड में, प्रसिद्ध ज्योतिषी नितिन कश्यप जी के साथ, हम मरण कारक स्थान (MKS) के रहस्यों को उजागर करेंगे।
- मरण कारक स्थान (MKS) क्या है और इसका महत्व
- किस भाव में कौन सा ग्रह मरण कारक स्थान बनाता है
- गुरु, शुक्र, मंगल और अन्य ग्रहों के लिए मरण कारक स्थान
- मंगल 7वें भाव में, सूर्य 12वें भाव में, चंद्र 8वें भाव में, और अन्य विशिष्ट स्थितियाँ
- मरण कारक स्थान के उपाय और इसका प्रैक्टिकल उपयोग
- लग्नेश के अष्टम में होने और अष्टमेश के लग्न में होने में अंतर: लग्नेश के अष्टम में होने और अष्टमेश के लग्न में होने में क्या अंतर है? जानें इसके बारे में।
- मृत्यु भाग में ग्रह का फल: कोई ग्रह मृत्यु भाग में होने पर क्या फल देता है? जानें इसके बारे में।
- चंद्रमा 29 डिग्री पर: क्या चंद्रमा 29 डिग्री पर होने पर कोई फल नहीं देगा? जानें इसके बारे में।
- गंडमूल निकालना: गंडमूल कैसे निकालते हैं? जानें इसके बारे में।
- अयनांश का चयन: अयनांश कौनसा लें? जानें इसके बारे में।
- षडबल के छह प्रकार के बल का उपयोग: षडबल के छह प्रकार के बल का फलित में क्या उपयोग होता है? जानें इसके बारे में।
- जातक की धन जमा करने की क्षमता: जातक कितना धन जमा कर पाएगा, क्या इसे एक सटीक राशि में प्रडिक्ट कर पाना संभव है? जानें इसके बारे में।
- कुंभ राशि में सूर्य शनि की युति: कुंभ राशि में सूर्य शनि की युति का क्या प्रभाव होता है? जानें इसके बारे में।
- धन भाव में शनि और केतु की युति: धन भाव में शनि और केतु की युति का क्या प्रभाव होता है? जानें इसके बारे में।
- मेष लग्न में स्वराशि का मंगल: मेष लग्न में स्वराशि का मंगल, लग्न में ज्यादा अच्छा है या अष्टम भाव में वृश्चिक राशि का? जानें इसके बारे में।
- एक ही लग्न के दो व्यक्तियों का कुंडली मिलान: एक ही लग्न के दो व्यक्तियों का कुंडली मिलान कैसे करेंगे? जानें इसके बारे में।
- लग्नाधिपति के नक्षत्र का जातक पर प्रभाव: लग्नाधिपति के नक्षत्र का जातक पर क्या प्रभाव होता है? जानें इसके बारे में।
- लग्न संधि पर हो तो बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन: लग्न संधि पर हो तो बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन कैसे करें? जानें इसके बारे में।
ज्योतिष और अध्यात्म की दुनिया में आपका स्वागत है! इस एपिसोड में हम बात करेंगे कई महत्वपूर्ण विषयों पर:
- पति पत्नी के जन्म लग्न और चन्द्र लग्न: पति पत्नी दोनों के ही जन्म लग्न और चन्द्र लग्न सम सप्तक हों तो विवाह कैसा रहता है? जानें इसके बारे में।
- भगवान राम की कुंडली: भगवान राम की कुंडली में गज केसरी योग और उस पर शनि और मंगल की दृष्टि, क्या है इसका महत्व? जानें इसके बारे में।
- नीच ग्रह और उच्च का स्वामी: किसी नीच ग्रह का राशि का स्वामी उच्च का होकर वक्री हो जाए तो क्या नीच भंग माना जाएगा? जानें इसके बारे में।
- जेमस्टोन की प्रभावशीलता: क्या जेमस्टोन काम करते हैं? जानें इसके बारे में।
- वृषभ लग्न में शनि: वृषभ लग्न में, लग्न में शनि अस्त है, क्या फल होगा? जानें इसके बारे में।
- शनि चन्द्र सम सप्तक: शनि चन्द्र सम सप्तक हों और राशि परिवर्तन में होना क्या दिखाता है? जानें इसके बारे में।
- 11th क्लास के बच्चे के लिए सब्जेक्ट: 11th क्लास के बच्चे के लिए सब्जेक्ट कैसे देखें कुंडली में? जानें इसके बारे में।
- जातक का मूल स्वभाव और कार्यशैली: जातक का मूल स्वभाव और कार्यशैली कैसे देखें कुंडली में? जानें इसके बारे में।
- फ्री विल एंड डेस्टिनी: क्या हमारा जीवन पूर्व निर्धारित है या हमारे पास अपनी पसंद के अनुसार जीने की स्वतंत्रता है? जानें इसके बारे में।
- दूसरे विवाह के बारे में: जब कुंडली का सप्तमेश और द्वितीयेश एक ही ग्रह हो, तो दूसरे विवाह की संभावना क्या है? जानें इसके बारे में।
- पौष महीने में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा: पौष महीने में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा करना शुभ है या नहीं? जानें इसके बारे में।
- उग्र और तीक्ष्ण नक्षत्र: उग्र और तीक्ष्ण नक्षत्रों की लड़ाई में कौन जीतेगा? जैसे मूल और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र।
- छह आठ बारह के स्वामी सप्तम भाव में: जब छह, आठ, और बारह के स्वामी सप्तम भाव में इकट्ठे हो जाएं, तो क्या होगा? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति और गोचर आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- बच्चे की परीक्षा: कैसे देखें बच्चा परीक्षा में पास होगा कि नहीं? जानें इसके बारे में।
- मिथुन लग्न और मंगल: मिथुन लग्न में उच्च का मंगल क्या फल देगा? जानें इसके बारे में।
- वृश्चिक लग्न और गुरु का गोचर: वृश्चिक लग्न के सप्तम भाव में गुरु है और सप्तम भाव से ही गुरु का गोचर, यह समय कैसा रहेगा? जानें इसके बारे में।
- अमावस्या पर जन्म: अमावस्या पर जन्मे जातक के माता पिता का आपसी सम्बन्ध कैसा रहेगा? जानें इसके बारे में।
- सिंह लग्न और गुरु-राहु-शुक्र युति: सिंह लग्न के अष्टम भाव में गुरु राहु शुक्र युति कैसी रहेगी? जानें इसके बारे में।
- कोर्ट केस और चुनाव: कोर्ट केस और चुनाव में जीत होगी या हार, कैसे देखें? जानें इसके बारे में।
- ग्रह का उच्च भंग: क्या ग्रह का उच्च भंग भी होता है? जानें इसके बारे में।
- देश काल परिस्थिति और कुंडली: अगर देश काल परिस्थिति का प्रभाव ज्यादा पड़ता है तो कुंडली का प्रभाव क्या रह जाता है? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे दशा, गोचर और ग्रहों की स्थिति आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- दशा और कुंडली: दशा को जन्म कुंडली से देखना चाहिए या भाव चलित कुंडली से? जानें इसके बारे में।
- गुरु का गोचर: गुरु का गोचर चन्द्र कुंडली से देखना चाहिए या लग्न कुंडली से? जानें इसके बारे में।
- चंद्रमा की साढ़े साती: क्या चंद्रमा की साढ़े साती के दौरान जातक अपने माता पिता को खो देता है? जानें इसके बारे में।
- शनि और लग्न: कन्या और मिथुन लग्न में शनि को कारक मानें या अकारक? जानें इसके बारे में।
- कलयुग में गुरु का गोचर: कलयुग में गुरु का गोचर घातक? जानें इसके बारे में।
- गुरु का गोचर और जन्म कुंडली: जन्म कुंडली के गुरु पर से गुरु का गोचर, क्या है इसका प्रभाव? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति और भाव आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- ग्रहों का भाव मध्य और चलित कुंडली: अगर बहुत सारे ग्रह भाव मध्य पर हों लेकिन चलित कुंडली में दूसरे भाव में चले जाएं तो क्या रिज़ल्ट होगा? जानें इसके बारे में।
- राजयोग और छठे-बारहवें भाव: क्या छठे और बारहवें भाव में बैठे ग्रह भी राजयोग बना सकते हैं? जानें इसके बारे में।
- शुक्र का मीन राशि या बारहवें भाव में होना: शुक्र का मीन राशि या बारहवें भाव में होना अच्छा माना जाता है, लेकिन यदि वह लग्नेश या सप्तमेश हो तब भी क्या यह अच्छा ही फल देगा? जानें इसके बारे में।
- बच्चे की कुंडली और शिक्षा: कुंडली में कैसे देखें बच्चा जीनियस होगा या एवरेज स्टूडेंट? जानें इसके बारे में।
- ग्रह का फलित और राशि-नक्षत्र: किसी ग्रह का फलित करने के लिए उसकी राशि और नक्षत्र में से किसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति और दशा आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है:
- अशुभ ग्रह और शुभ फल: क्या अशुभ ग्रह भी अपनी महादशा में शुभ फल दे सकते हैं और शुभ ग्रह अशुभ? अगर हां, तो कैसे? जानें इसके बारे में।
- केतु और बृहस्पति की युति: केतु और बृहस्पति की युति का फल क्या होगा? जानें इसके बारे में।
- छठे भाव के स्वामी की दशा: क्या छठे भाव के स्वामी की दशा बहुत कष्टकारी हो सकती है अगर छठे भाव में उस ग्रह की मूल त्रिकोण राशि हो? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति और गोचर आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- तुला लग्न और सूर्य: तुला लग्न में, सूर्य का मेष राशि में कैसा फल होगा? नीच का या उच्च का? जानें इसके बारे में।
- सिंह लग्न और वक्री मंगल: सिंह लग्न में वक्री मंगल पर से राहु का गोचर और राहु में मंगल की दशा, क्या फलित होगा? जानें इसके बारे में।
- अष्टम भाव परिवर्तन: अष्टम भाव परिवर्तन का है, लेकिन ये कैसे जाने की यह परिवर्तन जातक के लिए शुभ रहेगा या अशुभ (भौतिक सुख को ध्यान में रखते हुए)? जानें इसके बारे में।
- नक्षत्र परिवर्तन: क्या नक्षत्र परिवर्तन को राशि परिवर्तन की तरह ही देखना चाहिए? जानें इसके बारे में।
- मंगल और वृश्चिक राशि: मंगल एक अग्नि तत्व ग्रह है, फिर एक जल तत्व राशि वृश्चिक का स्वामी क्यूं है और यह कैसे फल देगा? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे कुंडली से आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं का पता लगाया जा सकता है:
- आध्यात्मिक जीवनसाथी: कुंडली में आध्यात्मिक जीवनसाथी मिलने के योग कौन से हैं? जानें इसके बारे में।
- दूसरे घर का स्वामी नीच: दूसरे घर का स्वामी यदि नीच हो तो क्या व्यक्ति को घर से दूर जाकर ही उन्नति मिलेगी? अगर हां, तो किस क्षेत्र या दिशा में जाना चाहिए?
- कालसर्प दोष और गुरुदेव: क्या गुरुदेव कालसर्प दोष पर विश्वास करते हैं? अगर हां, तो इसका क्या प्रभाव देखने को मिला है? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ज्योतिष के विभिन्न पहलू आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- सूक्ष्मता और दुख: कौन से योग व्यक्ति को सूक्ष्मता से चीजों को देखने के लिए मजबूर करते हैं और इसके परिणामस्वरूप दुखी रहने की संभावना है?
- उपाय और उनका प्रभाव: क्या ज्योतिषीय उपाय सच में काम करते हैं या इनका सिर्फ साइकोलॉजिकल इंपैक्ट होता है? जानें इसके बारे में।
- लग्न और लग्नेश: लग्न और लग्नेश में से किसके बल को अधिक महत्व देना चाहिए? इन दोनों के फलित में क्या अंतर है? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे 88वें नवांश का उपयोग करके आप अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझ सकते हैं:
- दशम भाव में क्रूर ग्रह: दशम भाव में क्रूर ग्रह कहां बुरे परिणाम देते हैं? जानें इसके बारे में।
- 88वा नवांश: 88वें नवांश की गणना और उपयोगिता क्या है? जानें इसके बारे में।
- प्रश्न तंत्र में उपयोगिता: प्रश्न तंत्र में 88वें नवांश की क्या भूमिका है? जानें इसके बारे में।
- चन्द्र कुंडली में महत्व: चन्द्र कुंडली में भी 88वें नवांश से ग्रहों के गोचर को देखना क्यों जरूरी है?
- 88वे नवांश में बैठे ग्रह: 88वें नवांश में बैठे ग्रह को कैसे देखें और इसके परिणाम क्या होंगे?
- भाव चलित और 88वा नवांश: भाव चलित और 88वें नवांश के बीच क्या संबंध है? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे कुंडली से विभिन्न पहलुओं का पता लगाया जा सकता है:
- व्यक्तिगत विशेषताएं: कुंडली से व्यक्ति के रंग, लंबाई और अन्य विशेषताओं का कैसे पता लगाया जा सकता है?
- ग्रहों का समूह: एक ही भाव में 5 ग्रह होने का क्या अर्थ है और इसके परिणाम क्या होंगे?
- जीवनसाथी से मुलाकात: कुंडली से कैसे जानें कि आप अपने जीवनसाथी से पहली बार कहाँ मिलेंगे?
- ग्रह युद्ध: क्या यह सच है कि ग्रह युद्ध में शुक्र कभी नहीं हारता? जानें इसके पीछे के कारण।
- काल पुरुष कुंडली: काल पुरुष कुंडली में दशमेश और कर्म के कारक शनि को दशमांश कुंडली में कैसे देखा जाता है? जानें इसके बारे में।
जानें कैसे ज्योतिष के विभिन्न पहलू आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं:
- जीरो डिग्री के ग्रह: जीरो डिग्री पर स्थित ग्रह किस प्रकार के फल देते हैं? जानें इसके बारे में।
- पराक्रम और भाग्य: ज्योतिष में पराक्रम और भाग्य का महत्व क्या है? क्या पराक्रम या भाग्य अधिक महत्वपूर्ण है?
- नवांश का महत्व: षोडशवर्गों में नवांश को सबसे अधिक महत्व क्यों दिया गया है? जानें इसके पीछे के कारण।
- योग कारक और मारक ग्रह: अगर कोई योग कारक और मारक ग्रह पीड़ित हो तो उसका नेगेटिव प्रभाव कहां अधिक होगा? जानें इसके बारे में।
ज्योतिष के शौकीनों के लिए उपयोगी जानकारी। आइए जानते हैं इन विषयों पर विस्तार से। #ज्योतिष #नवांश #पराक्रम #भाग्य
जानें कैसे कुंडली से अपने इष्ट देवता और भक्ति के प्रकार का पता लगाया जा सकता है:
- इष्ट देवता और नवधा भक्ति: कुंडली से कैसे जानें कि कौन सी भक्ति आपके लिए अनुकूल है?
- विदेश सेटलमेंट और यात्रा: कुंडली में विदेश सेटल होने और विदेश घूमने के योगों में अंतर क्या है?
- विदेश की परिभाषा: ज्योतिष में विदेश किसे मानते हैं और इसके क्या मायने हैं?
ज्योतिष के शौकीनों के लिए उपयोगी जानकारी। आइए जानते हैं इन विषयों पर विस्तार से। #ज्योतिष #कुंडली #विदेश #भक्ति
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है:
- नीच ग्रह के नुकसान: नीच ग्रह जातक को कहां नुकसान दे सकते हैं? जानें इसके बारे में।
- चन्द्र कुंडली और जन्म कुंडली: चन्द्र कुंडली और जन्म कुंडली से कारक अकारक ग्रहों का महत्व और प्रभाव।
- उच्च भंग का नियम: ग्रह के उच्च भंग का नियम और इसके परिणाम।
- नीच का बुध और उच्च का शुक्र: नीच का बुध उच्च के शुक्र के साथ कैसा फल देगा? जानें इसके बारे में।
- अष्टकवर्ग और षडबल: अष्टकवर्ग में कम बिंदु होने पर भी भावेश के षडबल में अच्छा होने का फल।
- नीच भंग और अशुभ फल: पूर्णतः नीच भंग होने पर क्या ग्रह कोई भी अशुभ फल नहीं देगा? जानें इसके बारे में।
- नीचता उच्चनाथ से भंग: नीचता उच्चनाथ से भंग होने और नीच ग्रह के भाव में उच्च ग्रह होने का परिणाम।
- पारिजात योग: पारिजात योग क्या है और इसके परिणाम क्या होते हैं?
जानें कैसे ग्रहों की स्थिति आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है:
- वृश्चिक लग्न में नीच का बुध: वृश्चिक लग्न में नीच का बुध उच्च के शुक्र के साथ होने पर 5वें, 7वें और 11वें भाव का क्या फल होगा?
- अकारक ग्रह का नीच भंग: कुंडली में अकारक ग्रह के नीच भंग का क्या फलित होगा? जानें इसके बारे में।
- मिथुन लग्न में नीच का मंगल: मिथुन लग्न के दूसरे भाव में नीच के मंगल का फलित क्या होगा? जानें इसके बारे में।
इन विषयों पर चर्चा करके, आप अपने जीवन में ग्रहों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और अपने भविष्य को सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।
जानें कैसे नीच ग्रह आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं और इसके प्रभाव को कैसे समझा जा सकता है:
- नीच ग्रह और राशि परिवर्तन: राशि परिवर्तन में नीच ग्रह का प्रभाव और नीच भंग की संभावना
- नीच ग्रह क्या होता है: नीच ग्रह की परिभाषा और इसके प्रभाव को समझें
- नीच ग्रह के फल: नीच ग्रह कैसे फल देते हैं और इसके परिणाम
- नीच ग्रह के अच्छे फल: कब ग्रह नीच होकर भी अच्छे फल दे सकते हैं
- नवांश में नीच ग्रह: जन्म कुंडली में नीच ग्रह लेकिन नवांश में स्वराशि या उच्च राशि का प्रभाव
- नीच वर्गोत्तम का फल: नीच वर्गोत्तम का फल और इसके परिणाम
- षडबल और विंशोपक बल: ग्रह नीच हो लेकिन षडबल और विंशोपक बल में अच्छा स्थित हो तो प्रभाव
जानें कैसे ज्योतिष के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है:
- नीच भंग राजयोग: यदि कोई ग्रह नीच का होकर भी केंद्र में स्थित हो तो फल देने में सक्षम होता है। जानें कैसे नीच भंग राजयोग आपके जीवन को प्रभावित कर सकता है।
- विपरीत राजयोग: मीन लगन के जातक के लिए आठवें भाव का स्वामी शुक्र छठे भाव में पीड़ित होने पर क्या विपरीत राजयोग बनाता है? जानें इसके बारे में।
- डी9 परिणाम: डी9 परिणाम देने की क्षमता को कैसे बदलता है? जानें कैसे नवांश कुंडली आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है।
- अस्त ग्रह: क्या अस्त ग्रह की दृष्टि होती है? जानें कैसे अस्त ग्रह आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।
- आदित्य हृदय स्तोत्र: आदित्य हृदय स्तोत्र क्यों पढ़ना चाहिए? जानें इसके लाभ और महत्व।
- लग्नेश और उच्च: मतदान - किस लग्न में लग्नेश छठे भाव में उच्च का हो जाता है? जानें इसके बारे में।
- संतान प्राप्ति: पंचमेश शुक्र 10वें घर में उच्च का है लेकिन 5वें घर में राहु है, सूर्य उच्च का है। संतान प्राप्ति के लिए क्या कहा जा सकता है? जानें इसके बारे में।
- सभी ग्रह केंद्र में: सभी ग्रह केंद्र में होने पर क्या उम्मीद करें? जानें कैसे ग्रहों की स्थिति आपके जीवन को प्रभावित कर सकती है