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Suno Kahaniyan
Poonam
328 episodes
11 hours ago
https://youtube.com/channel/UCoDc0x0zXDhO1toAzIHWrUg
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Episodes (20/328)
Suno Kahaniyan
kusum story written by Munshi Premchand
https://youtu.be/IXcgwRAzQuU
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3 years ago
50 minutes 5 seconds

Suno Kahaniyan
Shiv prasad singh;Nanhon
https://youtu.be/AFHaRyx9jfk
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3 years ago
2 hours 16 minutes 25 seconds

Suno Kahaniyan
सिकंदर की शपथ कहानी जय शंकर प्रसाद
https://youtu.be/Kucfzuei-hM
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3 years ago
10 minutes 12 seconds

Suno Kahaniyan
Gatank se aage story written by Malti Joshi
https://youtu.be/eLaEVvZr8Ts
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3 years ago
22 minutes

Suno Kahaniyan
Gunda story written by Jai Shankar Prasad
https://youtu.be/2Gg075Kb9lk कहानी काशी के एक गुंडे की जिसकी बहादुरी देखते ही बनती थी
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3 years ago
30 minutes 9 seconds

Suno Kahaniyan
अपहरण ; मालती जोशी
https://youtu.be/jWOlFJCm7CM
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3 years ago
13 minutes 50 seconds

Suno Kahaniyan
निर्वासित कर दी तुमने मेरी प्रीत story written by Malti Joshi
https://youtu.be/5mBlShMuGGA
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3 years ago
57 minutes 35 seconds

Suno Kahaniyan
Use buddha ne kaata story written by Madhu kankaria
https://youtu.be/qJWscfJ42V0
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3 years ago
41 minutes 55 seconds

Suno Kahaniyan
Panchayat story written by जय शंकर प्रसाद
https://youtu.be/k0PN0IS7yyg
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3 years ago
7 minutes 18 seconds

Suno Kahaniyan
Aabhusan story written by Premchand
https://youtu.be/7L7PnYWzOF8
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3 years ago
48 minutes 34 seconds

Suno Kahaniyan
Kanyadaan story written by Malti Joshi
https://youtu.be/kYg00VyYT3I
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3 years ago
29 minutes 58 seconds

Suno Kahaniyan
Dukhiya story written by Jaishankar prasaad
https://youtu.be/fg0CpELnVeo Dukhiya Jaishankar Prasad दुखिया जयशंकर प्रसाद 1 पहाड़ी देहात, जंगल के किनारे के गाँव और बरसात का समय! वह भी ऊषाकाल! बड़ा ही मनोरम दृश्य था। रात की वर्षा से आम के वृक्ष तराबोर थे। अभी पत्तों से पानी ढुलक रहा था। प्रभात के स्पष्ट होने पर भी धुँधले प्रकाश में सड़क के किनारे आम्रवृक्ष के नीचे बालिका कुछ देख रही थी। 'टप' से शब्द हुआ, बालिका उछल पड़ी, गिरा हुआ आम उठाकर अञ्चल में रख लिया। (जो पाकेट की तरह खोंस कर बना हुआ था।) दक्षिण पवन ने अनजान में फल से लदी हुई डालियों से अठखेलियाँ कीं। उसका सञ्चित धन अस्त-व्यस्त हो गया। दो-चार गिर पड़े। बालिका ऊषा की किरणों के समान ही खिल पड़ी। उसका अञ्चल भर उठा। फिर भी आशा में खड़ी रही। व्यर्थ प्रयास जान कर लौटी, और अपनी झोंपड़ी की ओर चल पड़ी। फूस की झोंपड़ी में बैठा हुआ उसका अन्धा बूढ़ा बाप अपनी फूटी हुई चिलम सुलगा रहा था। दुखिया ने आते ही आँचल से सात आमों में से पाँच निकाल कर बाप के हाथ में रख दिये। और स्वयं बरतन माँजने के लिए 'डबरे' की ओर चल पड़ी। बरतनों का विवरण सुनिए, एक फूटी बटुली, एक लोंहदी और लोटा, यही उस दीन परिवार का उपकरण था। डबरे के किनारे छोटी-सी शिला पर अपने फटे हुए वस्त्र सँभाले हुए बैठकर दुखिया ने बरतन मलना आरम्भ किया। 2 अपने पीसे हुए बाजरे के आटे की रोटी पकाकर दुखिया ने बूढ़े बाप को खिलाया और स्वयं बचा हुआ खा-पीकर पास ही के महुए के वृक्ष की फैली जड़ों पर सिर रख कर लेट रही। कुछ गुनगुनाने लगी। दुपहरी ढल गयी। अब दुखिया उठी और खुरपी-जाला लेकर घास छीलने चली। जमींदार के घोड़े के लिए घास वह रोज दे आती थी, कठिन परिश्रम से उसने अपने काम भर घास कर लिया, फिर उसे डबरे में रख कर धोने लगी।
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3 years ago
6 minutes 45 seconds

Suno Kahaniyan
Vasiyat story written by Malti Joshi
https://youtu.be/aZC0Dr6vDPU वसीयत मालती जोशी
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3 years ago
19 minutes 46 seconds

Suno Kahaniyan
Snehbandh story written by Malti Joshi
https://youtu.be/juM-OE-jyJE माँ,ये है मीतू -- मैत्रेयी।" ध्रुव ने परिचय करवाया तो देखती ही रह गई। कटे बाल के नीचे एक छोटा-सा चेहरा - वह भी आधा गॉगल्स से ढँका हुआ। नेवी ब्ल्यू रंग की जीन्स के ऊपर चटख पीले रंग का पुलोवर। उस पर बने हुए केबल्स इतने प्यारे कि कोई और होता तो पास बिठाकर पहले डिजाइन उतार लेती - बाकी बातें बाद में होतीं। ''पर ये मीतू थी -- मैत्रेयी।'' अपनी सारी प्रतिक्रिया मन ही में समेटकर मैंने सहज स्वर में कहा, " ड्राइंगरूम में चलकर बैठो तुम लोग, मैं पापा को बुला लाऊँ?" बच्चों के पापा हस्बेमामूल बगिया में ईजी चेयर में लेटे अखबार पढ़ रहे थे। चार पन्नों का अखबार है, लेकिन पढ़ने में सुबह से शाम कर देंगे। अपनी सारी खीज उन पर उँडेलते हुए मैंने कहा, "बहूरानी आई हैं, चलकर मुआयना कर लीजिए।" "बहूरानी!" उन्होंने चौंककर पूछा, फिर चश्मा उतारकर मुझे सीधे देखते हुए बोले, "बहूरानी आई है तो तुम्हारा स्वर इतना तल्ख क्यों हैं?" एक-दो नहीं, साथ रहते पूरे अठ्ठाईस साल हो गए हैं। मेरे स्वर का एक-एक उतार-चढ़ाव उन्हें कंठस्थ हो गया है। फिर भी मैंने कोई जवाब नहीं दिया और चाय बनाने के बहाने रसोई में चली गई।
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3 years ago
36 minutes 59 seconds

Suno Kahaniyan
वासवदत्ता : आचार्य चतुरसेन शास्त्री Vasavadatta : Acharya Chatursen Shastri
https://youtu.be/o0PyLSkhxag (वासवदत्ता महाराज उदयन की कला पर आसक्त होकर उनसे नृत्य-संगीत सीखने लगी। दोनों में असीम प्रेम उत्पन्न हो गया। और अन्त में विवाह भी। इस कहानी में उदयन और वासवदत्ता की तत्कालीन भावनाओं का श्रेष्ठ चित्रण है।) एक समय कौशाम्बी के राजकुमार उदयन शिकार खेलने वन में गए। वहां जाकर उन्होंने देखा, एक मदारी एक बहुत बड़े और सून्दर सर्प को ज़बर्दस्ती पकड़े लिए जा रहा है। सर्प उससे छुटने को छटपटा रहा है। राजकुमार उदयन को सर्प पर बड़ी दया आई और उन्होंने पुकारकर मदारी से कहा—अरे हमारे कहने से इस सर्प को छोड़ दे।
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3 years ago
15 minutes 34 seconds

Suno Kahaniyan
Abhilasha story written By Munshi प्रेमचंद
https://youtu.be/pXEWkLAxxMs Abhilasha Munshi Premchand अभिलाषा मुंशी प्रेम चंद कल पड़ोस में बड़ी हलचल मची। एक पानवाला अपनी स्त्री को मार रहा था। वह बेचारी बैठी रो रही थी, पर उस निर्दयी को उस पर लेशमात्र भी दया न आती थी। आखिर स्त्री को भी क्रोध आ गया। उसने खड़े होकर कहा, बस, अब मारोगे, तो ठीक न होगा। आज से मेरा तुझसे कोई संबंध नहीं। मैं भीख माँगूँगी, पर तेरे घर न आऊँगी। यह कहकर उसने अपनी एक पुरानी साड़ी उठाई और घर से निकल पड़ी। पुरुष काठ के उल्लू की तरह खड़ा देखता रहा। स्त्री कुछ दूर चलकर फिर लौटी और दूकान की संदूकची खोलकर कुछ पैसे निकाले।
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3 years ago
17 minutes 9 seconds

Suno Kahaniyan
Eid story written by Padma sachdev
https://youtu.be/FnFdvbEb2CA ईद ; पद्मा सचदेव
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3 years ago
17 minutes 28 seconds

Suno Kahaniyan
Bhari dophari ke andere ; Madhu kankaria
https://youtu.be/FZEsjcl1lNA
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3 years ago
1 hour 3 minutes 26 seconds

Suno Kahaniyan
Ve Das Minute story written by Madhu Kankaria
https://youtu.be/3L_uvUuTx0s Ve das minute ;Madhu Kankaria
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3 years ago
44 minutes 49 seconds

Suno Kahaniyan
Ek Nav Ke Yatri ;Gulser Khan Shaani
https://youtu.be/6xxWaTuuAIc कीर्ति मारे उत्सुकता के फिर खड़ी हो गई. यह पाँचवी मरतबा था, लेकिन इस बार लगा कि सीटी की आवाज सचमुच दूर से काफी नजदीक होती आ रही है और गाड़ी प्लेटफार्म में प्रवेश करे, इसमें अधिक देर नहीं... घबराहट से चेहरे का पसीना पोंछने के लिए उसने रूमाल टटोला. नहीं था. बेंच पर छूटने की भी कोई संभावना नहीं थी. जल्दी-जल्दी यही होता है, उसने सोचा. वह साड़ी से ही मुँह पोंछना चाहती थी, लेकिन तभी यक-ब-यक सारे प्लेटफार्म में मुसाफिरों तथा सामान लदे कुलियों की भगदड़ मच गई - 'हेलो!' सहसा उसी समय अपने कंधे पर पड़े स्पर्श से कीर्ति चौंकी. चौंकी ही नहीं, धक्क-सी रह गई. क्षण के छोटे से खंड में लगा था कि कहीं रज्जन ही न हो, पर थीं वे मिसेज मित्तल. रॉ-सिल्क की आसमानी साड़ी में अच्छी तरह कसी-कसाई और चुस्त. किसी विदेशी सेंट की बहुत भीनी खुशबू एक क्षण के लिए हवा में ठहर गई थी. 'अरे!' कीर्ति ने जल्दी से हाथ जोड़े, 'कहाँ जा रही हो?' 'भोपाल,' मिसेज मित्तल ने इतने सहज भाव में कहा जैसे उनका भोपाल जाना रोज-रोज की बात हो, 'और तुम!' उनकी आँखें बार-बार कंपार्टमेंट की ओर बढ़ते अपने कुली की ओर लगी हुई थीं. 'रज्जन आ रहा है.' मिसेज मित्तल के नए रूप वाले प्रभाव से मुक्त होने के लिए कीर्ति एक साँस में कह गई. वैसे पिछले कई घंटे से यह वाक्य उसे भीतर-भीतर तंग जरूर कर रहा था लेरकिन इस पल मिसेज मित्तल के अतिरिक्त वह और कोई बात नहीं सोच रही थी. बरसों बाद उन्हें इतना सिंगार-पटार किए कीर्ति देखे और खुद उनकी जबानी भोपाल जाने की बात सुने तो फिर अविश्वास की कहाँ गुंजाइश रह जाती है! 'अच्छा!' रज्जन की बात सुनकर एक पाँव से जमीं और दूसरे से उखड़ती हुई मिसेज मित्तल ने अपनी आँखों को और फैला लिया, पूछ रही थीं, 'इस गाड़ी से?' 'हाँ?'
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3 years ago
34 minutes 19 seconds

Suno Kahaniyan
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